din dahakti dhoop ne mujh ko jalaya der tak | दिन दहकती धूप ने मुझ को जलाया देर तक

  - Jafar Shirazi
दिनदहकतीधूपनेमुझकोजलायादेरतक
राततन्हाईमेंकालाअब्रबरसादेरतक
तूयेकहताहैकितूकलरातमेरेसाथथा
मैंयेकहताहूँकिमैंनेतुझकोढूँडादेरतक
पासरखकरउजलेउजलेदूधसेयादोंकेजिस्म
देरसेबैठाहूँमेंबैठारहूँगादेरतक
पहलेतेरीचाहतोंकेग़मथेअबफ़ुर्क़तकेदुख
मुझपेअबतारीरहेगायेभीअर्सादेरतक
कौनठहरेआनेवालेमौसमोंकेसामने
कौनख़ालीरखसकेताक़-ए-तमाशादेरतक
अबवोबातेंअबवोक़िस्सेकिसतरह'जाफ़र'भुलाएँ
ऐसेसदमोंकाअसरदिलपररहेगादेरतक
  - Jafar Shirazi
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