hareem-e-zaat ke parde men justuju yaaraan | हरीम-ए-ज़ात के पर्दे में जुस्तुजू याराँ

  - Jafar Raza
हरीम-ए-ज़ातकेपर्देमेंजुस्तुजूयाराँ
ज़हे-नसीबमुझेमेरीआरज़ूयाराँ
हवसकोइश्क़बताकरतही-कदूयाराँ
मय-ए-अयाग़सेछलकागएलहूयाराँ
शबाबहैमिरेसाक़ीकाआफ़्ताबकीलौ
बदनहैसाज़मेंदीपककीइकनुमूयाराँ
इसीगुनहनेमलाएकपेफ़ौक़ियतबख़्शी
यहीगुनहबशरिय्यतकीआबरूयाराँ
कभीख़िज़ाँमेंकभीख़ार-ओ-ख़सकेपर्देमें
चमनमेंबिखरेहैंहर-सम्तरंग-ओ-बूयाराँ
जिसेमैंख़ुदसेभीकहनेकीताबलासका
वोएकबातकहीउनकेरू-ब-रूयाराँ
वहीतोजाम-ए-शिफ़ाहैबला-कशोंकेलिए
वोइकनिगाहजोफिरतीहैचार-सूयाराँ
उसीख़लिशनेउसेख़ुद-कुशीपेउकसाया
किएकशख़्ससेमिलताहैहू-ब-हूयाराँ
ज़मानाबदलाहैरंग-ए-चमनभीबदलेगा
चिनारअबनज़रआतेहैंशो'ला-रूयाराँ
  - Jafar Raza
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