kabhi to dosto apne watan ki baat karen | कभी तो दोस्तो अपने वतन की बात करें

  - Jafar Raza
कभीतोदोस्तोअपनेवतनकीबातकरें
कभीतोचाक-ए-दिल-ओ-पैरहनकीबातकरें
ख़िरदकीबज़्ममेंदीवाने-पनकीबातकरें
हिकायतोंमेंकिसीसीम-तनकीबातकरें
गुलोंकेसामनेक्याफ़िक्र-ओ-फ़नकीबातकरें
येसादालोगहैंउनसेचमनकीबातकरें
ख़याल-ए-यारसलामतहज़ारबज़्म-ए-तरब
ग़ज़लकेनामपेगुल-पैरहनकीबातकरें
मशाम-ए-जाँमेंवोगेसूमहकतेजातेहैं
किसीख़ुतनकीमुश्क-ए-ख़ुतनकीबातकरें
निगाह-ए-फ़ित्नाहैएकइकअदाक़यामतहै
वोलाखबनकेबड़ेभोलपनकीबातकरें
भलीसीबातअज़ीज़ोंपेबारहोतीहै
दयार-ए-ग़ैरमेंकैसेवतनकीबातकरें
शनासाचेहरेयहाँअजनबीसेलगतेहैं
होंअहल-ए-ज़ौक़तोअहल-ए-सुख़नकीबातकरें
जहाँपेक़त्लहोउर्दूज़बाँनफ़ासतसे
चलोकुछआजउसीअंजुमनकीबातकरें
  - Jafar Raza
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