har-samt taazgi si jharnon ki nagmgi se kitnii | हर-सम्त ताज़गी सी झरनों की नग़्मगी से कितनी

  - Jafar Raza
हर-सम्तताज़गीसीझरनोंकीनग़्मगीसेकितनी
मुशाबहतहैसाक़ीतिरीहँसीसे
क्याजानेकितनेफ़ित्नेउठतेहैंकज-रवीसे
वोशख़्सयूँँब-ज़ाहिरमिलताहैसादगीसे
अक्सरग़ज़लहुईहैकुछऐसीजाँ-कनीसे
जैसेग़ज़ालदेखेसहरामेंबेबसीसे
इकमर्द‌‌‌‌-ए-बा-सफ़ानेलिखालहूसेअपने
इज़्ज़तकीमौतबेहतरज़िल्लतकीज़िंदगीसे
सदियोंतलकरहीहैतहज़ीबकीनिगहबाँ
पत्थरतराशतेथेकुछलोगशाइ'रीसे
अबआदमीबनेहैंइकदूसरेकेसाइल
अबआदमीगुरेज़ाँरहताहैआदमीसे
शोख़ी-ओ-बज़्ला-संजीदोशीज़गीवहीहै
मासूमियतगईबसएहसास-ए-आगहीसे
जबहोग़रज़तोमलिएवर्नाखिंचेसेरहिए
हमतंगचुकेहैंइसशानदर-ए-दिलबरीसे
'जाफ़र'-रज़ातुमअबतकअच्छे-भलेथेलेकिन
मिट्टीख़राबकरलीक्यूँँतुमनेशाइ'रीसे
  - Jafar Raza
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