khizaan ke dosh pe hai fasl-e-gul ka rakht abhii | ख़िज़ाँ के दोश पे है फ़स्ल-ए-गुल का रख़्त अभी

  - Jafar Baluch
ख़िज़ाँकेदोशपेहैफ़स्ल-ए-गुलकारख़्तअभी
किबर्ग-ओ-बारसेख़ालीहैहरदरख़्तअभी
अभीग़मोंसेइबारतहैसर-नविश्त-ए-बशर
किआसमानपरेहैज़मीनसख़्तअभी
समझशुआ-ए-बुरीदासिर्फ़जुगनूको
किरनकिरनकाजिगरहोगालख़्तलख़्तअभी
मता-ए-जाँभीउसेपेशकरचुकाहूँमैं
मिरेरक़ीबकालहजाहैक्यूँँकरख़्तअभी
तमामरातरहामय-कदा-नशीं'जाफ़र'
गयाहैउठकेयहाँसेवोनेक-बख़्तअभी
  - Jafar Baluch
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