tamaam shahar to be-mehr neend so raha tha | तमाम शहर तो बे-मेहर नींद सो रहा था

  - Jabbar Wasif
तमामशहरतोबे-मेहरनींदसोरहाथा
मगरमैंआँखोंमेंनोक-ए-क़लमचुभोरहाथा
मैंजानताथामिरेअश्कमरनेवालेहैं
मैंजानताथाकिजोमेरेसाथहोरहाथा
मुझेख़बरनहींकबआँसूओंकोहोशआया
ख़बरहुईतोमैंज़ार-ओ-क़ताररोरहाथा
कुछइसलिएभीख़ुदाकीमुझेज़रूरतथी
मैंअपनेखेतमेंगंदुमकेबीजबोरहाथा
ख़यालआयामुझेजबख़ुदाबदलनेका
मैंअपनेअश्कोंसेहर्फ़-ए-दुआभिगोरहाथा
मुझेजगादियाजबफज्रकेमोअज़्ज़िनने
दरून-ए-ख़्वाबमैंमस्जिदकासहनधोरहाथा
समझरहाथाजिसेमैंभीनूहकीकश्ती
उसीकानाख़ुदालोगोंकोअबडुबोरहाथा
थाबा-नसीबभीऔरबद-नसीबभी'वासिफ़'
जोपारहाथाकिसीकोकिसीकोखोरहाथा
  - Jabbar Wasif
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