ajeeb KHvaab tha ham baagh men khade hue the | अजीब ख़्वाब था हम बाग़ में खड़े हुए थे

  - Jabbar Wasif
अजीबख़्वाबथाहमबाग़मेंखड़ेहुएथे
हमारेसामनेफूलोंकेसरपड़ेहुएथे
बरहनातितलियाँरक़्साँथींउर्यांशाख़ोंपर
ज़मींमेंसारेशजरशर्मसेगड़ेहुएथे
तमामपातथेनीलेबुज़ुर्गबरगदके
उसीकोडसनेसेसाँपोंकेफनबड़ेहुएथे
ज़ईफ़पेड़थेबूढ़ीहवासेशर्मिंदा
जवाँपरिंदेकिसीबातपरअड़ेहुएथे
कोईनग़्मा-ए-बुलबुलकोईनग़्मा-ए-गुल
ख़ुदा-ए-सुब्हसेसबख़ुश-गुलूलड़ेहुएथे
वहींपेसामने'वासिफ़'थाएकक़ब्रिस्ताँ
जहाँयहाँवहाँसबनामवरसड़ेहुएथे
फिरएकक़ब्रहुईशक़तोउसमेंथेदोदिल
औरउनदिलोंमेंमोहब्बतकेनगजड़ेहुएथे
  - Jabbar Wasif
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