मुझेकोईऐसीग़ज़लसुनाकिमैंरोपड़ूँ
ज़राजयजयविन्तीकेसुरलगाकिमैंरोपड़ूँ
मिरेज़ब्ततुझकोमिरीतरफ़सेयेइज़्नहै
मिराआजइतनातोदिलदुखाकिमैंरोपड़ूँ
येजोख़ाकओढ़केसोरहीहैमिरीहँसी
यूँँबिलकबिलककेउसेजगाकिमैंरोपड़ूँ
मिरेख़ुद-कुशीकेख़यालपरमिरेहालपर
मिरीबेबसीमुझेयूँँहँसाकिमैंरोपड़ूँ
तुझेइल्महैमिराकोईतेरेसिवानहीं
मुझेआकेऐसेगलेलगाकिमैंरोपड़ूँ
मैंजहान-ए-सुर्ख़मेंसब्ज़-पोशचराग़हूँ
मिरीलौकोइतनानआज़माकिमैंरोपड़ूँ
मिराबख़्तमेरानसीबतुझसेछुपानहीं
मुझेदेतूऐसीकोईदु'आकिमैंरोपड़ूँ
येजोइश्क़कीसियहशालहैयेवबालहै
उसेयूँँनदेखकेमुस्कुराकिमैंरोपड़ूँ
मिरीआँखेंअबभीतिरीगलीमेंहैंख़ेमा-ज़न
फ़क़तएकबारउन्हेंदेखजाकिमैंरोपड़ूँ
मिरानामतूनेरखाथा'वासिफ़'-ए-ना-तमाम
इसीनामसेमुझेफिरबुलाकिमैंरोपड़ूँ