mujhe koi aisi ghazal suna ki main ro padhoon | मुझे कोई ऐसी ग़ज़ल सुना कि मैं रो पड़ूँ

  - Jabbar Wasif
मुझेकोईऐसीग़ज़लसुनाकिमैंरोपड़ूँ
ज़राजयजयविन्तीकेसुरलगाकिमैंरोपड़ूँ
मिरेज़ब्ततुझकोमिरीतरफ़सेयेइज़्नहै
मिराआजइतनातोदिलदुखाकिमैंरोपड़ूँ
येजोख़ाकओढ़केसोरहीहैमिरीहँसी
यूँँबिलकबिलककेउसेजगाकिमैंरोपड़ूँ
मिरेख़ुद-कुशीकेख़यालपरमिरेहालपर
मिरीबेबसीमुझेयूँँहँसाकिमैंरोपड़ूँ
तुझेइल्महैमिराकोईतेरेसिवानहीं
मुझेकेऐसेगलेलगाकिमैंरोपड़ूँ
मैंजहान-ए-सुर्ख़मेंसब्ज़-पोशचराग़हूँ
मिरीलौकोइतनाआज़माकिमैंरोपड़ूँ
मिराबख़्तमेरानसीबतुझसेछुपानहीं
मुझेदेतूऐसीकोईदु'आकिमैंरोपड़ूँ
येजोइश्क़कीसियहशालहैयेवबालहै
उसेयूँँदेखकेमुस्कुराकिमैंरोपड़ूँ
मिरीआँखेंअबभीतिरीगलीमेंहैंख़ेमा-ज़न
फ़क़तएकबारउन्हेंदेखजाकिमैंरोपड़ूँ
मिरानामतूनेरखाथा'वासिफ़'-ए-ना-तमाम
इसीनामसेमुझेफिरबुलाकिमैंरोपड़ूँ
  - Jabbar Wasif
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