ahbaab mire dard se kuchh be-KHabar na the | अहबाब मिरे दर्द से कुछ बे-ख़बर न थे

  - J. P. Saeed
अहबाबमिरेदर्दसेकुछबे-ख़बरथे
येऔरबातहैवोकोईचारा-गरथे
ताक़तथीजबबदनमेंतोदरवाज़ाबंदथा
जबदरखुलाक़फ़सकामिरेबाल-ओ-परथे
अंजानहमथेराहसेमंज़िलभीदूरथी
अच्छाहुआकिआपशरीक-ए-सफ़रथे
इसवास्तेभीमुझकोतिराग़मअज़ीज़है
जितनेभीग़ममिलेवोग़ममो'तबरथे
तारीकरातकाथासफ़रराहपुर-ख़तर
रौशनकहींचराग़सर-ए-रहगुज़रथे
वोदिनभीक्याथेदिलमेंतमन्नाथीकोई
तकमील-ए-आरज़ूकेलिएदर-ब-दरथे
सैलाब-ओ-ज़लज़लेमेंहुएकितनेघरतबाह
वोलोगबे-नियाज़रहेजिनकेघरथे
कुछलोगमिलगएथेयूँँहीराहमेंमुझे
जोमेरेसाथसाथथेवोहम-सफ़रथे
सबनेमिराकलामपढ़ालेकिन'सईद'
जोमेरेनाक़िदीनथेवोदीदा-वरथे
  - J. P. Saeed
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