sehar ka noor hai taaron ka in'i'kaas nahin | सहर का नूर है तारों का इनइ'कास नहीं

  - J. P. Saeed
सहरकानूरहैतारोंकाइनइ'कासनहीं
फ़रेब-ख़ुर्दाहोतुमयाज़िया-शनासनहीं
जबीन-ए-सुब्हपेतहरीरहैयेख़त्त-ए-जली
नएनिज़ाममेंतफ़रीक़-ए-आम-ओ-ख़ासनहीं
येकिसवसूक़सेअनवार-ए-सुब्हकहतेहैं
नईहयातसेकोईभीवज्ह-ए-यासनहीं
येऔरबातहैदिलख़ूनहोगयाग़मसे
नज़रमेंआपकीअबभीकोईउदासनहीं
वोऔरहोंगेजिन्हेंज़िंदगीकेऐशमिले
यहाँतोएकतबस्सुमभीहमकोरासनहीं
फ़रेब-ओ-किज़्बदरियासेमैंबे-तअल्लुक़हूँ
ब-जुज़ख़ुलूस-ओ-वफ़ाकुछभीमेरेपासनहीं
'सईद'दोस्तमिलेहैंमुझेकुछऐसेभी
किजिनकोमेहर-ओ-मोहब्बतकाकोईपासनहीं
  - J. P. Saeed
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