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Purnima Singh
ras
ras | रस्में दुनिया में ढल न पाए हम
- Purnima Singh
रस्में
दुनिया
में
ढल
न
पाए
हम
साथ
में
इसके
चल
न
पाए
हम
सबकी
क़िस्मत
बदलते
देखी
है
अपनी
क़िस्मत
बदल
न
पाए
हम
सबको
वो
मिल
गया
मचलने
से
जिसकी
ख़ातिर
मचल
न
पाए
हम
बे
वफ़ाई
ने
उसकी
यूँँ
तोड़ा
कि
अभी
तक
सँभल
न
पाए
हम
सबको
छोड़ा
था
उसकी
ख़ातिर
पर
साथ
उसके
भी
चल
न
पाए
हम
- Purnima Singh
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इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
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Nasir Kazmi
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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यूँँ
ही
दिन
रात
ख़सारा
होगा
फिर
तो
मुश्किल
से
गुज़ारा
होगा
टूटे
ख़्वाबों
को
बना
करके
ग़ज़ल
उसने
पन्नों
पे
उतारा
होगा
एक
लहज़े
में
बिखर
कर
उसने
जाने
कितनों
को
सॅंवारा
होगा
तुझको
देखेंगे
किसी
और
के
साथ
हम
को
कैसे
ये
गवारा
होगा
ज़िंदगी
रास
हमें
आएगी
जब
वो
इक
शख़्स
हमारा
होगा
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Purnima Singh
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ज़ख़्म
ईजाद
करके
देखा
है
ख़ुद
को
बर्बाद
करके
देखा
है
मांगने
से
तो
कुछ
नहीं
मिलता
हम
ने
फ़रियाद
करके
देखा
है
कोई
फिर
लौट
कर
नहीं
आता
हम
ने
आज़ाद
करके
देखा
है
इक
अजब
सी
ख़ुशी
मिली
हमको
ख़ुद
को
नाशाद
करके
देखा
है
दिल
ने
ज़ख़्मों
की
बात
छेड़ी
थी
सो
तुझे
याद
करके
देखा
है
हिज्र
में
रक़्स
तजरिबा
है
इक
जो
तिरे
बाद
करके
देखा
है
ख़त्म
होती
नहीं
है
वीरानी
दिल
को
आबाद
करके
देखा
है
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Purnima Singh
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आप
मेरा
ख़याल
छोड़ो
नाॅं
दर्द
है
ला-ज़वाल
छोड़ो
नाॅं
हो
गया
जो
लिखा
था
क़िस्मत
में
क्या
करें
अब
मलाल
छोड़ो
नाॅं
भरते-भरते
ये
भर
ही
जाएगा
ज़ख़्म
की
देखभाल
छोड़ो
नाॅं
जाने
क्या
क्या
छुपा
हो
दरिया
में
आप
पानी
में
जाल
छोड़ो
नाॅं
रूह
को
नोचती
है
तन्हाई
जिस्म
है
बे
ख़याल
छोड़ो
नाॅं
एक
अरसे
से
मेरे
कमरे
का
है
शिकस्ता
सा
हाल
छोड़ो
नाॅं
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Purnima Singh
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