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Purnima Singh
yuñ hi din raat khasaara hogaa
yuñ hi din raat khasaara hogaa | यूँँ ही दिन रात ख़सारा होगा
- Purnima Singh
यूँँ
ही
दिन
रात
ख़सारा
होगा
फिर
तो
मुश्किल
से
गुज़ारा
होगा
टूटे
ख़्वाबों
को
बना
करके
ग़ज़ल
उसने
पन्नों
पे
उतारा
होगा
एक
लहज़े
में
बिखर
कर
उसने
जाने
कितनों
को
सॅंवारा
होगा
तुझको
देखेंगे
किसी
और
के
साथ
हम
को
कैसे
ये
गवारा
होगा
ज़िंदगी
रास
हमें
आएगी
जब
वो
इक
शख़्स
हमारा
होगा
- Purnima Singh
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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आप
मेरा
ख़याल
छोड़ो
नाॅं
दर्द
है
ला-ज़वाल
छोड़ो
नाॅं
हो
गया
जो
लिखा
था
क़िस्मत
में
क्या
करें
अब
मलाल
छोड़ो
नाॅं
भरते-भरते
ये
भर
ही
जाएगा
ज़ख़्म
की
देखभाल
छोड़ो
नाॅं
जाने
क्या
क्या
छुपा
हो
दरिया
में
आप
पानी
में
जाल
छोड़ो
नाॅं
रूह
को
नोचती
है
तन्हाई
जिस्म
है
बे
ख़याल
छोड़ो
नाॅं
एक
अरसे
से
मेरे
कमरे
का
है
शिकस्ता
सा
हाल
छोड़ो
नाॅं
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Purnima Singh
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ज़ख़्म
ईजाद
करके
देखा
है
ख़ुद
को
बर्बाद
करके
देखा
है
मांगने
से
तो
कुछ
नहीं
मिलता
हम
ने
फ़रियाद
करके
देखा
है
कोई
फिर
लौट
कर
नहीं
आता
हम
ने
आज़ाद
करके
देखा
है
इक
अजब
सी
ख़ुशी
मिली
हमको
ख़ुद
को
नाशाद
करके
देखा
है
दिल
ने
ज़ख़्मों
की
बात
छेड़ी
थी
सो
तुझे
याद
करके
देखा
है
हिज्र
में
रक़्स
तजरिबा
है
इक
जो
तिरे
बाद
करके
देखा
है
ख़त्म
होती
नहीं
है
वीरानी
दिल
को
आबाद
करके
देखा
है
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Purnima Singh
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रस्में
दुनिया
में
ढल
न
पाए
हम
साथ
में
इसके
चल
न
पाए
हम
सबकी
क़िस्मत
बदलते
देखी
है
अपनी
क़िस्मत
बदल
न
पाए
हम
सबको
वो
मिल
गया
मचलने
से
जिसकी
ख़ातिर
मचल
न
पाए
हम
बे
वफ़ाई
ने
उसकी
यूँँ
तोड़ा
कि
अभी
तक
सँभल
न
पाए
हम
सबको
छोड़ा
था
उसकी
ख़ातिर
पर
साथ
उसके
भी
चल
न
पाए
हम
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Purnima Singh
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