aur hi kahii thehre aur hi kahii pahunchen | और ही कहीं ठहरे और ही कहीं पहुँचे

  - Ikram Mujeeb
औरहीकहींठहरेऔरहीकहींपहुँचे
जिसजगहपहुँचनाथाहमवहाँनहींपहुँचे
हिज्रकीमसाफ़तमेंसाथतूरहाहरदम
दूरहोगएतुझसेजबतिरेक़रींपहुँचे
ताएर-ए-तलबकीहैहरउड़ानउसदरतक
ना-मुराददिलकाहररास्तावहींपहुँचे
रुख़करेइधरकाहीहरअज़ाबदुनियाका
आसमाँसेजोउतरेवोबलायहींपहुँचे
हरदिलनज़रमेंहोइकनिखारसापैदा
बद-गुमानज़ेहनोंतकनेमत-ए-यक़ींपहुँचे
  - Ikram Mujeeb
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy