maut si KHamoshii jab un labon pe taari ki | मौत सी ख़मोशी जब उन लबों पे तारी की

  - Ikram Mujeeb
मौतसीख़मोशीजबउनलबोंपेतारीकी
तबकहींनिभापाईरस्मराज़दारीकी
हमअभीनिदामतकीक़ैदसेनहींनिकले
काटतेहैंरोज़शबफ़स्लबे-क़रारीकी
भूलहीनहींसकतेग़म-ए-जहाँतूने
जिसतरहपज़ीराईउम्रभरहमारीकी
कमज़राहोनेदीएकलफ़्ज़कीहुरमत
एकअहदकीसारीउम्रपासदारीकी
सबअना-परस्तीकीमसनदोंपेहैंफ़ाएज़
सरकरेकड़ीमंज़िलकौनख़ाकसारीकी
पुर-ख़तररिफ़ाक़तवोजोमफ़ादकेताबे
सोचबे-समरअपनीज़ातकेपुजारीकी
एकदर्दकीलज़्ज़तबरक़राररखनेको
कुछलतीफ़जज़्बोंकीख़ूँसेआबयारीकी
  - Ikram Mujeeb
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