kisi sabab se agar bolta nahin hooñ main | किसी सबब से अगर बोलता नहीं हूँ मैं

  - Iftikhar Mughal
किसीसबबसेअगरबोलतानहींहूँमैं
तोयूँँनहींकितुझेसोचतानहींहूँमैं
मैंतुमकोख़ुदसेजुदाकरकेकिसतरहदेखूँ
किमैंभी''तुम''हूँ,कोईदूसरानहींहूँमैं
तोयेभीतय!किबिछड़करभीलोगजीतेहैं
मैंजीरहाहूँ!अगरचेजियानहींहूँमैं
किसीमेंकोईबड़ा-पनमुझेदिखाईदे
ख़ुदाकाशुक्रकिइतनाबड़ानहींहूँमैं
मिरीउठानकीहरईंटमैंनेरक्खीहै
मैंख़ुदबनाहूँ!बनायाहुआनहींहूँमैं
यहाँजोआएगावोख़ुदकोहारजाएगा
क़िमार-ख़ाना-ए-जाँमेंनयानहींहूँमैं
मिरेवजूदकेअंदरमुझेतलाशकर
किइसमकानमेंअक्सररहानहींहूँमैं
मैंएकउम्रसेख़ुदकोतलाशताहूँमगर
मुझेयक़ीननहीं,हूँभीयानहींहूँमैं
मैंइकगुमानकाइम्काँहूँ'इफ़्तिख़ार'-मुग़ल
किहोतोसकताहूँलेकिनहुआनहींहूँमैं
  - Iftikhar Mughal
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