ik khala ek la-intihaa aur main | इक ख़ला, एक ला-इंतिहा और मैं

  - Iftikhar Mughal
इकख़ला,एकला-इंतिहाऔरमैं
कितनेतन्हाहैंमेराख़ुदाऔरमैं
कितनेनज़दीकऔरकिसक़दरअजनबी!!
मुझमेंमुझसाकोईदूसराऔरमैं
लोगभीसोगए,रोगभीसोगए
जागतेहैंमिरारत-जगाऔरमैं
रातऔररातमेंगूँजतीएकबात
एकख़ौफ़,इकमुंडेर,इकदियाऔरमैं
शहरताराजहै,जब्रकाराजहै
फिरभीसाबितहैंमेरीअनाऔरमैं
तेरेमौसम,तिरीगुफ़्तुगूऔरतू
मेरीआँखोंमेंइकअन-कहा,औरमैं
अबतोइसजंगकाफ़ैसलाहोकोई
लड़रहेहैंअज़लसेहवाऔरमैं
रंग,ख़ुशबू,शफ़क़,चाँदनी,शाएरी
लिखरहाथामैं,उसनेकहा''औरमैं!''
उसकीबातऔरहै,वर्ना'इफ़्तिख़ार'
उसकोमा'लूमहै,इल्तिजाऔरमैं
  - Iftikhar Mughal
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