yoonhi vaabastagi nahin hoti | यूँँही वाबस्तगी नहीं होती

  - Ibn-e-Safi
यूँँहीवाबस्तगीनहींहोती
दूरसेदोस्तीनहींहोती
जबदिलोंमेंग़ुबारहोताहै
ढंगसेबातभीनहींहोती
चाँदकाहुस्नभीज़मीनसेहै
चाँदपरचाँदनीनहींहोती
जोगुज़रेपरी-वशोंमेंकभी
कामकीज़िंदगीनहींहोती
दिनकेभूलेकोरातडसतीहै
शामकोवापसीनहींहोती
आदमीक्यूँँहैवहशतोंकाशिकार
क्यूँँजुनूँमेंकमीनहींहोती
इकमरज़केहज़ारहैंनब्बाज़
फिरभीतश्ख़ीसहीनहींहोती
  - Ibn-e-Safi
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