aaj ki raat kategi kyun kar saaz na jaam na to mehmaan | आज की रात कटेगी क्यूँँ कर साज़ न जाम न तो मेहमान

  - Ibn-e-Safi
आजकीरातकटेगीक्यूँँकरसाज़जामतोमेहमान
सुब्हतलकक्याजानिएक्याहोआँखलगेयाजाएजान
पिछलीरातकासन्नाटाकहताहैअबक्याआएँगे
अक़्लयेकहतीहैसोजाओदिलकहताहैएकमान
मुल्क-ए-तरबकेरहनेवालोयेकैसीमजबूरीहै
होंटोंकीबस्तीमेंचराग़ाँदिलकेनगरइतनेसुनसान
उनकीबाँहोंकेहल्क़ेमेंइश्क़बनाहैपीर-ए-तरीक़
अबऐसेमेंबताओयारोकिसजाकुफ़्रकिधरईमान
हमकहेंगेआपकेआगेरोरोदीदेखोएहैं
आपनेबिपतासुनलीहमारीबड़ाकरमलाखोंएहसान
  - Ibn-e-Safi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy