bade ghazab ka hai yaaro bade azaab ka zakham | बड़े ग़ज़ब का है यारो बड़े अज़ाब का ज़ख़्म

  - Ibn-e-Safi
बड़ेग़ज़बकाहैयारोबड़ेअज़ाबकाज़ख़्म
अगरशबाबहीठहरामिरेशबाबकाज़ख़्म
ज़रासीबातथीकुछआसमाँफटपड़ता
मगरहराहैअभीतकतिरेजवाबकाज़ख़्म
ज़मींकीकोखहीज़ख़्मीनहींअँधेरोंसे
हैआसमाँकेभीसीनेपेआफ़्ताबकाज़ख़्म
मैंसंगसारजोहोतातोफिरभीख़ुशरहता
खटकरहाहैमगरदिलमेंइकगुलाबकाज़ख़्म
उसीकीचारागरीमेंगुज़रगई'असरार'
तमामउम्रकोकाफ़ीथाइकशबाबकाज़ख़्म
  - Ibn-e-Safi
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