छलकतीआएकिअपनीतलबसेभीकमआए
हमारेसामनेसाक़ीब-साग़र-ए-जमआए
फ़रोग़-ए-आतिश-ए-गुलहीचमनकीठंडकहै
सुलगतीचीख़तीरातोंकोभीतोशबनमआए
बसएकहमहीलिएजाएँदरस-ए-इज्ज़-ओ-नियाज़
कभीतोअकड़ीहुईगर्दनोंमेंभीख़मआए
जोकारवाँमेंरहेमीर-ए-कारवाँकेक़रीब
नजानेक्यूँँवोपलटआएऔरबरहमआए
निगार-ए-सुब्हसेपूछेंगेशबगुज़रनेदो
कीज़ुल्मतोंसेउलझकरवोआईयाहमआए
अजीबबातहैकीचड़मेंलहलहाएकँवल
फटेपुरानेसेजिस्मोंपेसजकेरेशमआए
मसीहकौनबनेसारेहाथआलूदा
लहूलुहानहैधरतीकहाँसेमरहमआए