raah-e-talab men kaun kisi ka apne bhi begaane hain | राह-ए-तलब में कौन किसी का अपने भी बेगाने हैं

  - Ibn-e-Safi
राह-ए-तलबमेंकौनकिसीकाअपनेभीबेगानेहैं
चाँदसेमुखड़ेरश्क-ए-ग़ज़ालाँसबजानेपहचानेहैं
तन्हाईसीतन्हाईहैकैसेकहेंकैसेसमझाएँ
चश्मलब-ओ-रुख़्सारकीतहमेंरूहोंकेवीरानेहैं
उफ़येतलाश-ए-हुस्न-ओ-हक़ीक़तकिसजाठहरेंजाएँकहाँसहन-ए-चमनमेंफूलखिलेहैंसहरामेंदीवानेहैं
हमकोसहारेक्यारासआएँअपनासहाराहैंहमआप
ख़ुदहीसहराख़ुदहीदिवानेशम-ए-नफ़सपरवानेहैं
बिल-आख़िरथकहारकेयारोहमनेभीतस्लीमकिया
अपनीज़ातसेइश्क़हैसच्चाबाक़ीसबअफ़्सानेहैं
  - Ibn-e-Safi
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