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Khumar Barabankvi
na haara hai ishq aur na duniya thaki hai
na haara hai ishq aur na duniya thaki hai | न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
- Khumar Barabankvi
न
हारा
है
इश्क़
और
न
दुनिया
थकी
है
दिया
जल
रहा
है
हवा
चल
रही
है
- Khumar Barabankvi
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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तुमने
जो
फूल
लेते
में
छू
लीं
हैं
उंगलियाँ
मेरे
बदन
से
आएगी
ख़ुशबू
गुलाब
की
Siddharth Saaz
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प्यार
की
जोत
से
घर
घर
है
चराग़ाँ
वर्ना
एक
भी
शम्अ
न
रौशन
हो
हवा
के
डर
से
Shakeb Jalali
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वक़्त
किस
तेज़ी
से
गुज़रा
रोज़-मर्रा
में
'मुनीर'
आज
कल
होता
गया
और
दिन
हवा
होते
गए
Muneer Niyazi
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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नदी
को
कोसते
हैं
सब
किसी
के
डूब
जाने
पर
नदी
में
डूबते
को
पर
कोई
तिनका
नहीं
देता
Alankrat Srivastava
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मेरा
हाथ
पकड़
ले
पागल,
जंगल
है
जितना
भी
रौशन
हो
जंगल,
जंगल
है
Umair Najmi
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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हटाए
थे
जो
राह
से
दोस्तों
की
वो
पत्थर
मेरे
घर
में
आने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
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ये
कहना
था
उन
से
मोहब्बत
है
मुझ
को
ये
कहने
में
मुझ
को
ज़माने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
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वही
फिर
मुझे
याद
आने
लगे
हैं
जिन्हें
भूलने
में
ज़माने
लगे
हैं
Khumar Barabankvi
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हुस्न
जब
मेहरबाँ
हो
तो
क्या
कीजिए
इश्क़
के
मग़्फ़िरत
की
दु'आ
कीजिए
इस
सलीक़े
से
उन
से
गिला
कीजिए
जब
गिला
कीजिए
हँस
दिया
कीजिए
दूसरों
पर
अगर
तब्सिरा
कीजिए
सामने
आइना
रख
लिया
कीजिए
आप
सुख
से
हैं
तर्क-ए-तअ'ल्लुक़
के
बा'द
इतनी
जल्दी
न
ये
फ़ैसला
कीजिए
ज़िंदगी
कट
रही
है
बड़े
चैन
से
और
ग़म
हों
तो
वो
भी
अता
कीजिए
कोई
धोका
न
खा
जाए
मेरी
तरह
ऐसे
खुल
के
न
सब
से
मिला
कीजिए
अक़्ल
ओ
दिल
अपनी
अपनी
कहें
जब
'ख़ुमार'
अक़्ल
की
सुनिए
दिल
का
कहा
कीजिए
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Khumar Barabankvi
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भूले
हैं
रफ़्ता
रफ़्ता
उन्हें
मुद्दतों
में
हम
क़िस्तों
में
ख़ुद-कुशी
का
मज़ा
हम
से
पूछिए
Khumar Barabankvi
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