hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Hrishita Singh
dil kushaada hai ab bhi unki hi KHaatir
dil kushaada hai ab bhi unki hi KHaatir | दिल कुशादा है अब भी उनकी ही ख़ातिर
- Hrishita Singh
दिल
कुशादा
है
अब
भी
उनकी
ही
ख़ातिर
दिल
पे
गुज़री
कोई
क़यामत
नहीं
है
- Hrishita Singh
Download Sher Image
उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
Send
Download Image
17 Likes
दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
34 Likes
कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
Send
Download Image
153 Likes
देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
Send
Download Image
21 Likes
दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
Send
Download Image
32 Likes
हम
को
किस
के
ग़म
ने
मारा
ये
कहानी
फिर
सही
किस
ने
तोड़ा
दिल
हमारा
ये
कहानी
फिर
सही
Masroor Anwar
Send
Download Image
38 Likes
वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
Send
Download Image
33 Likes
तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
Read Full
SHIV SAFAR
Send
Download Image
4 Likes
उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
21 Likes
आज
है
उनको
आना,
मज़ा
आएगा
फिर
जलेगा
ज़माना,
मज़ा
आएगा
तीर
उनकी
नज़र
के
चलेंगे
कई
दिल
बनेगा
निशाना
मज़ा
आएगा
Read Full
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
41 Likes
Read More
जाने
यहाँ
मिलते
हैं
कैसे
कैसे
लोग
कुछ
अलहदा
कुछ
हम
सेे
मिलते
जुलते
लोग
Hrishita Singh
Send
Download Image
0 Likes
दुनिया
के
ग़म
फिर
उसी
को
सौंप
कर
के
मैं
भी
आख़िर
हँस
ही
दूँगी
खिलखिला
कर
Hrishita Singh
Send
Download Image
2 Likes
सारा
ग़म
आँखों
से
बह
जाता
है
तू
फिर
भी
आँखों
में
रह
जाता
है
इन
आँखों
में
अब
कैसी
हलचल
है
ये
बातें
तो
मुझ
सेे
कह
जाता
है
कुछ
दिन
की
हस्ती
इस
में
इतने
ग़म
नस्ल-ए-आदम
क्या
कुछ
सह
जाता
है
मुझको
देखोगे
तो
ये
जानोगे
कैसे
ख़्वाबों
का
घर
ढह
जाता
है
Read Full
Hrishita Singh
Download Image
0 Likes
सारे
आँगन
भी
चुप
हो
रहे
हैं
अब
तो
जंगल
भी
सब
रो
रहे
हैं
रूह
तो
कब
की
ही
मर
चुकी
है
अब
तो
हम
बस
बदन
ढो
रहे
हैं
सब
दरख़्तों
को
ये
काट
देते
फूल
गमलों
में
फिर
बो
रहे
हैं
रहते
कब
तक
उसी
वस्ल
में
हम
हिज्र
की
हम
वजह
हो
रहे
हैं
अब
नहीं
नींद
पूरी
मुनासिब
आधी
ही
नींद
बस
सो
रहे
हैं
सबकी
करते
थे
हम
ही
हिफ़ाज़त
अब
यहाँ
ख़ुद
ही
को
खो
रहे
हैं
ख़ाक
ही
तो
यहाँ
होते
हैं
सब
सब
सिकंदर
यहाँ
जो
रहे
हैं
ये
जो
आलम
मुनासिब
नहीं
था
हम
भी
इसकी
तरह
हो
रहे
हैं
Read Full
Hrishita Singh
Download Image
2 Likes
बाख़बर
थी
मैं
भी
इश्क़
की
चाल
से
और
फिर
इश्क़
ने
तेरे
ग़ाफ़िल
किया
Hrishita Singh
Send
Download Image
1 Like
Read More
Vishal Singh Tabish
Iftikhar Arif
Jaleel Manikpuri
Haseeb Soz
Abhishar Geeta Shukla
Ibn E Insha
Nazeer Banarasi
Muneer Niyazi
Iftikhar Naseem
Iqbal Ashhar
Get Shayari on your Whatsapp
Ghar Shayari
Aarzoo Shayari
Insaan Shayari
Nadii Shayari
Khudkushi Shayari