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Hrishita Singh
saara gham aankhoñ se bah jaata hai
saara gham aankhoñ se bah jaata hai | सारा ग़म आँखों से बह जाता है
- Hrishita Singh
सारा
ग़म
आँखों
से
बह
जाता
है
तू
फिर
भी
आँखों
में
रह
जाता
है
इन
आँखों
में
अब
कैसी
हलचल
है
ये
बातें
तो
मुझ
सेे
कह
जाता
है
कुछ
दिन
की
हस्ती
इस
में
इतने
ग़म
नस्ल-ए-आदम
क्या
कुछ
सह
जाता
है
मुझको
देखोगे
तो
ये
जानोगे
कैसे
ख़्वाबों
का
घर
ढह
जाता
है
- Hrishita Singh
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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तेरा
बुत
तो
नहीं
था
पास
मेरे,
तेरी
यादों
को
अपने
पास
रखा
गोया
हस्ते
हुए
भी
हमने
सदा,
अपने
दिल
को
बहुत
उदास
रखा
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Prince
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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ग़म-ए-हयात
ने
आवारा
कर
दिया
वर्ना
थी
आरज़ू
कि
तिरे
दर
पे
सुब्ह
ओ
शाम
करें
Majrooh Sultanpuri
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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उदासी
पर
कहे
हैं
शे'र
सबने
उदासी
को
जिया
कितनों
ने
लेकिन
?
Tanoj Dadhich
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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वो
तो
किसी
को
भी
अपना
ख़ास
नहीं
रखता
प्यारा
भी
हो
कोई
तो
वो
पास
नहीं
रखता
Hrishita Singh
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रिंदों
को
मयख़ाने
से
घर
ले
जाने
वाले
फिर
तेरा
भी
उन
मयख़ानों
से
क्या
रिश्ता
है
मयख़ाने
के
रस्ते
में
जो
भी
उनको
दिखता
इन
दुनिया
वालों
को
वो
ग़ाफ़िल
ही
लगता
है
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Hrishita Singh
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ये
अब
रौशनी
आँखों
में
चुभती
है
अँधेरा
ही
बस
अपना
सा
लगता
है
Hrishita Singh
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अब
मुक़द्दर
में
ही
नहीं
साथ
तेरा
कुछ
दु'आओं
में
मेरी
ताकत
नहीं
है
Hrishita Singh
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दिल
कुशादा
है
अब
भी
उनकी
ही
ख़ातिर
दिल
पे
गुज़री
कोई
क़यामत
नहीं
है
Hrishita Singh
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