hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Hrishita Singh
ab muqaddar men hi nahin saath teraa
ab muqaddar men hi nahin saath teraa | अब मुक़द्दर में ही नहीं साथ तेरा
- Hrishita Singh
अब
मुक़द्दर
में
ही
नहीं
साथ
तेरा
कुछ
दु'आओं
में
मेरी
ताकत
नहीं
है
- Hrishita Singh
Download Sher Image
शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
Send
Download Image
83 Likes
मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
54 Likes
अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
Read Full
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
128 Likes
क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
Send
Download Image
26 Likes
जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
87 Likes
हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
Read Full
Ambar
Send
Download Image
1 Like
बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
Send
Download Image
42 Likes
इस
से
पहले
कि
बिछड़
जाएँ
हम
दो
क़दम
और
मिरे
साथ
चलो
मुझ
सा
फिर
कोई
न
आएगा
यहाँ
रोक
लो
मुझको
अगर
रोक
सको
Read Full
Nasir Kazmi
Send
Download Image
38 Likes
हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
Send
Download Image
3 Likes
सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
34 Likes
Read More
बाख़बर
थी
मैं
भी
इश्क़
की
चाल
से
और
फिर
इश्क़
ने
तेरे
ग़ाफ़िल
किया
Hrishita Singh
Send
Download Image
1 Like
रंजिशें
सारी
भूल
जाती
क्या
लौट
मुझ
तक
कभी
वो
आती
क्या
जल
गई
इंतिज़ार
में
इतना
अब
मुलाक़ात
भी
जलाती
क्या
जो
बिछड़
कर
गया
है
मुझ
सेे
तो
उस
को
भी
मेरी
याद
आती
क्या
मेरे
माज़ी
की
इतनी
वहशत
थी
सच
मैं
आख़िर
उसे
बताती
क्या
उसने
थामा
नहीं
था
हाथ
मिरा
आख़िरश
उस
सेे
मैं
छुड़ाती
क्या
वो
नईं
लौटा
वास्ते
मेरे
मैं
भी
उस
सेे
ख़ुशी
जताती
क्या
बे-नियाज़ी
है
उसका
बंदा
ही
तो
सदा
भी
असर
दिखाती
क्या
Read Full
Hrishita Singh
Download Image
3 Likes
इक
कमरा
वो
है
जो
मुझ
में
खुलता
है
इक
कमरा
ये
है
जहाँ
मैं
खुलता
हूँ
Read Full
Hrishita Singh
Send
Download Image
3 Likes
सब
इशारों
से
मिरे
वाकिफ़
थे
वो
सो
ज़ुबाँ
से
कुछ
बताया
ही
नहीं
हम
भी
थे
शागिर्द
पहले
प्यार
के
इश्क़
पर
उसने
सिखाया
ही
नहीं
Read Full
Hrishita Singh
Send
Download Image
3 Likes
हम
उसका
ग़म
छुपाए
फिर
रहे
हैं
जिस
से
ये
दिल
लगाए
फिर
रहे
हैं
Hrishita Singh
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Hijr Shayari
Valentine Shayari
Sorry Shayari
Tevar Shayari
Bachpan Shayari