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Hrishita Singh
sab ishaaron se mire waakif the vo
sab ishaaron se mire waakif the vo | सब इशारों से मिरे वाकिफ़ थे वो
- Hrishita Singh
सब
इशारों
से
मिरे
वाकिफ़
थे
वो
सो
ज़ुबाँ
से
कुछ
बताया
ही
नहीं
हम
भी
थे
शागिर्द
पहले
प्यार
के
इश्क़
पर
उसने
सिखाया
ही
नहीं
- Hrishita Singh
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बाद
में
तुम
से
इश्क़
कर
लेंगे
पहले
ख़ुदस
तो
प्यार
कर
लें
हम
Shadab Asghar
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तू
मोहब्बत
नहीं
समझती
है
हम
भी
अपनी
अना
में
जलते
हैं
इस
दफा
बंदिशें
ज़ियादा
हैं
छोड़
अगले
जनम
में
मिलते
हैं
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Ritesh Rajwada
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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नींद
के
दायरे
में
हाज़िर
हूँ
ख़्वाब
के
रास्ते
में
हाज़िर
हूँ
याद
है
इश्क़
था
कभी
मुझ
सेे
मैं
उसी
सिलसिले
में
हाज़िर
हूँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
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अदब
वाले
अदब
की
महफ़िलें
पहचान
लेते
हैं
उन्हें
तुम
प्यार
से
कुछ
भी
कहो
वो
मान
लेते
हैं
जहाँ
तक
देख
सकते
हैं
वहाँ
तक
सुन
नहीं
सकते
मगर
जब
इश्क़
हो
जाए
तो
धड़कन
जान
लेते
हैं
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Hameed Sarwar Bahraichi
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शहर-वालों
की
मोहब्बत
का
मैं
क़ायल
हूँ
मगर
मैंने
जिस
हाथ
को
चूमा
वही
ख़ंजर
निकला
Ahmad Faraz
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अपनी
ज़िद
में
हारे
हैं
तुमने
अपने
सब
सेे
ज़्यादा
प्यारे
लोग
Hrishita Singh
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इक
जुस्तजू
दीदार
के
तेरे
सिवा
कुछ
भी
नहीं
ऐसा
नहीं
उन
रास्तों
पर
अब
रुका
मैं
ही
नहीं
ज़द
में
किसी
दीवार
के
उलझी
रही
हो
रौशनी
कमरे
में
मेरे
रौशनी
भी
अब
बसर
करती
नहीं
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Hrishita Singh
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तेरे
बिन
हम
भी
कर
ही
लेंगे
गुज़ारा
पर
तेरे
बिन
जीने
की
आदत
नहीं
है
Hrishita Singh
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याँ
दानाई
के
सब
दरवाज़े
भी
खुलते
हैं
याँ
सबको
इक
जैसा
ही
नश्शा
भी
होता
है
Hrishita Singh
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बीनाई
आँखों
की
भी
जा
चुकी
है
बस
सपने
भी
सजाए
फिर
रहे
हैं
बातों
में
अपनी
रखते
थे
उसे
हम
बातों
में
जिसकी
आए
फिर
रहे
हैं
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Hrishita Singh
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