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Hrishita Singh
rindon ko maykhaane se ghar le jaane waale
rindon ko maykhaane se ghar le jaane waale | रिंदों को मयख़ाने से घर ले जाने वाले
- Hrishita Singh
रिंदों
को
मयख़ाने
से
घर
ले
जाने
वाले
फिर
तेरा
भी
उन
मयख़ानों
से
क्या
रिश्ता
है
मयख़ाने
के
रस्ते
में
जो
भी
उनको
दिखता
इन
दुनिया
वालों
को
वो
ग़ाफ़िल
ही
लगता
है
- Hrishita Singh
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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प्यार
का
रिश्ता
ऐसा
रिश्ता
शबनम
भी
चिंगारी
भी
यानी
उन
सेे
रोज़
ही
झगड़ा
और
उन्हीं
से
यारी
भी
Ateeq Allahabadi
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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मिरी
तरफ़
से
तो
टूटा
नहीं
कोई
रिश्ता
किसी
ने
तोड़
दिया
ए'तिबार
टूट
गया
Akhtar Nazmi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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हम
इश्क़
के
मारों
का
इतना
ही
फ़साना
है
रोने
को
नहीं
कोई
हँसने
को
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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अगर
महबूब
की
आँखें
है
दुनिया
तो
मेरे
पास
फिर
दुनिया
नहीं
है
Ritesh Rajwada
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बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
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Khurram Afaq
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सारा
ग़म
आँखों
से
बह
जाता
है
तू
फिर
भी
आँखों
में
रह
जाता
है
इन
आँखों
में
अब
कैसी
हलचल
है
ये
बातें
तो
मुझ
सेे
कह
जाता
है
कुछ
दिन
की
हस्ती
इस
में
इतने
ग़म
नस्ल-ए-आदम
क्या
कुछ
सह
जाता
है
मुझको
देखोगे
तो
ये
जानोगे
कैसे
ख़्वाबों
का
घर
ढह
जाता
है
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Hrishita Singh
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उसकी
ही
यादों
में
पड़ा
रहता
है
ये
ये
मेरा
दिल
भी
कैसा
पगला
गया
है
Hrishita Singh
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इक
तो
उसकी
ऐसी
मतवाली
आँखें
तौबा
उस
पर
वो
बातें
भी
तो
ऐसी
ही
करता
है
Hrishita Singh
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बाख़बर
थी
मैं
भी
इश्क़
की
चाल
से
और
फिर
इश्क़
ने
तेरे
ग़ाफ़िल
किया
Hrishita Singh
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होना
अब
दर
-
बदर
छोड़
देंगे
ये
गली
रहगुज़र
छोड़
देंगे
काट
कर
तेरी
यादों
का
जंगल
नाम
तेरे
शजर
छोड़
देंगे
सजदे
में
रहना
इक
शख़्स
ख़ातिर
इल्तिजा
भी
असर
छोड़
देंगे
क़ैद
होने
के
डर
से
ही
अब
तो
पंछी
करना
बसर
छोड़
देंगे
है
अगर
पाना
मंज़िल
अकेले
फिर
अधूरा
सफ़र
छोड़
देंगे
मौत
आएगी
क्या
तुमको
भी
तब
हम
भी
तुमको
अगर
छोड़
देंगे
उम्र
थी
इक
सभी
शिकवों
की
भी
लेना
तेरी
ख़बर
छोड़
देंगे
अब
मुयस्सर
नहीं
उनको
रोज़ी
लड़के
भी
अपना
घर
छोड़
देंगे
अच्छा
है
तू
नहीं
हमको
हासिल
वरना
खोने
का
डर
छोड़
देंगे
आख़िरी
झूठ
है
कहते
हो,
ये
कहते
हो
ये
हुनर
छोड़
देंगे
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Hrishita Singh
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