gham-zada main bhi nahin aur gameen tu bhi nahin | ग़म-ज़दा मैं भी नहीं और ग़मीं तू भी नहीं

  - Hadis Salsal
ग़म-ज़दामैंभीनहींऔरग़मींतूभीनहीं
अबतोपाबंद-ए-वफ़ामैंभीनहींतूभीनहीं
मैंभीउफ़तादा-ए-अंदाज़-ए-तमन्ना-ए-हयात
या'नीदोशीज़ा-ए-फ़िर्दोस-ए-बरींतूभीनहीं
शफ़क़-ख़ेज़ी-ए-इज्माल-ए-सहरसद-अफ़्सोस
अक्स-ए-तारीकी-ए-शब-हा-ए-हज़ींतूभीनहीं
मैंकिहमज़ाद-ए-नशीनान-ए-हरीम-ए-ख़स्ता
हाएकाशाना-ए-बे-ख़सकामकींतूभीनहीं
ज़ीनत-ए-साया-ए-दीवार-ए-मकाँमेरागुमाँ
औरकोईभीनहींसाया-नशींतूभीनहीं
रूह-ए-पज़-मुर्दा-ए-तख़य्युललब-ओ-मुसहफ़-ए-नाज़
इसउदासीकासबबमेरेतईंतूभीनहीं
फ़ितरत-ए-गर्दिश-ए-आलाम-ए-तग़य्युरसेवरा
ख़ूगर-ए-ऐशमगरमैंभीनहींतूभीनहीं
  - Hadis Salsal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy