tum aziz aur tumhaara gham bhi aziz | तुम अज़ीज़ और तुम्हारा ग़म भी अज़ीज़

  - Hadi Machlishahri
तुमअज़ीज़औरतुम्हाराग़मभीअज़ीज़
किससेकिसकागिलाकरेकोई
माने-ए-अर्ज़मुझकोपास-ए-वफ़ा
उनकोज़िदइल्तिजाकरेकोई
तुमतग़ाफ़ुल-शिआरदिलमायूस
आहक्याहौसलाकरेकोई
ग़म-ए-दिलअबकिसीकेबसकानहीं
क्यादवाक्यादु'आकरेकोई
कौनसुनताहैग़म-नसीबोंकी
किसकेदरपरसदाकरेकोई
ख़ैरसुनलोमिराफ़साना-ए-ग़म
येतोकहदोगेक्याकरेकोई
सख़्तमुश्किलहैशरह-ए-दर्द-ए-निहाँ
किसतरहइब्तिदाकरेकोई
जिसकोदेखोवोहैवफ़ा-दुश्मन
किससेअहद-ए-वफ़ाकरेकोई
ख़त्मजौर-ओ-जफ़ाहैमर्ग-ए-वफ़ा
काशफिरइब्तिदाकरेकोई
लुत्फ़-ए-ताज़ीरजबहोजान-ए-हयात
क्यूँँ'हादी'ख़ताकरेकोई
  - Hadi Machlishahri
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