zabaan pe harf-e-shikaayat are maaz-allah | ज़बाँ पे हर्फ़-ए-शिकायत अरे मआज़-अल्लाह

  - Hadi Machlishahri
ज़बाँपेहर्फ़-ए-शिकायतअरेमआज़-अल्लाह
मुझेतिरेसितम-ए-सब्र-आज़माकीक़सम
बसइकनिगाह-ए-करमकाउमीद-वारहूँमैं
जफ़ा-शिआरतुझेमेरीइल्तिजाकीक़सम
तूहैबहारतोदामनमिराहोक्यूँँख़ाली
इसेभीभरदेगुलोंसेतुझेख़ुदाकीक़सम
ग़ज़बकीछेड़है'हादी'येऔरक्याकहिए
वोखारहेहैंमिरेतर्क-ए-मुद्दआकीक़सम
  - Hadi Machlishahri
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