roz dil ko mire ik zakham naya dete hain | रोज़ दिल को मिरे इक ज़ख़्म नया देते हैं

  - Gauhar Shaikh Purwi
रोज़दिलकोमिरेइकज़ख़्मनयादेतेहैं
आपक्याअपनाबनानेकीसज़ादेतेहैं
मेरीबेताबी-ए-दिलकाजोउड़ातेहैंमज़ाक़
वोभड़कतेहुएशो'लोंकोहवादेतेहैं
लोगकहतेहैंजिसेज़र्फ़वोअपनाहैमिज़ाज
अपनेदुश्मनसेभीहमप्यारजतादेतेहैं
कोईआवाज़नहींहोतीभरेबर्तनसे
औरख़ालीहोंतोहरगामसदादेतेहैं
देखकरमेरेनशेमनसेधुआँउठताहुआ
सूखेपत्तेभीदरख़्तोंकेहवादेतेहैं
ज़ख़्म-ए-दिलचाँदकीमानिंदचमकतेहैंमिरे
आपजबभूलीहुईबातसुनादेतेहैं
आपचुप-चापहीआतेहैंतसव्वुरमेंमगर
मेरेख़्वाबीदाख़यालोंकोजगादेतेहैं
सिर्फ़इकदेवतासमझाहैतुम्हेंमैंनेमगर
लोगपत्थरकोभीभगवानबनादेतेहैं
कच्चीदीवारकीमानिंदहैंहम'गौहर'
एकठोकरसेजिसेलोगगिरादेतेहैं
  - Gauhar Shaikh Purwi
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