duaon ke diye jab jal rahe the | दु'आओं के दिए जब जल रहे थे

  - Faizan Arif
दु'आओंकेदिएजबजलरहेथे
मिरेग़मआँसुओंमेंढलरहेथे
किसीनेकीकासायाथासरोंपर
जोलम्हेआफ़तोंकेटलरहेथे
हुआएहसासयेआधीसदीब'अद
यहाँपरसिर्फ़रस्तेचलरहेथे
वतनकीअज़्मतोंकोडसनेवाले
वतनकीआस्तींमेंपलरहेथे
बहुतनज़दीकथीमंज़िलहमारी
मगरसबरास्तेदलदलरहेथे
नहींबदलेअभीमुंसिफ़यहाँके
वहीहैंफ़ैसलेजोकलरहेथे
जहाँफ़ैज़ान-ए-आबादीबहुतहै
वहाँपरभीघनेजंगलरहेथे
  - Faizan Arif
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