jazbaat men jo mire muqaabil khade hue | जज़्बात में जो मेरे मुक़ाबिल खड़े हुए

  - Faizan Arif
जज़्बातमेंजोमेरेमुक़ाबिलखड़ेहुए
एहसासतबहुआमिरेबच्चेबड़ेहुए
दुश्मनकीज़दसेउसकोबचातोलियामगर
सीनेमेंमेरेतीरहैंअबतकगड़ेहुए
नायाबकिसक़दरहैंतुम्हेंकुछख़बरनहीं
हममिलगएजोराहमेंतुमकोपड़ेहुए
इकइश्क़कोतोताजमहलसेमिलादवाम
इकइश्क़कीमिसालवोकच्चेघड़ेहुए
तक़दीरकाउसूलहैदोस्तसब्रकर
रोज़ेरखेग़रीबनेतोदिनबड़ेहुए
वोक्यागयाकिअबतोसभीकुछबदलगया
पहलेतोशबहीथीसोअबदिनभीकड़ेहुए
'फैज़ान'ऐसेदिलमेंबसीहैकिसीकीयाद
जैसेअंगूठियोंमेंनगीनेजड़ेहुए
  - Faizan Arif
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