haal-e-dil sirf tumhein ham ne sunaane ke li.e | हाल-ए-दिल सिर्फ़ तुम्हें हम ने सुनाने के लिए

  - Faizan Arif
हाल-ए-दिलसिर्फ़तुम्हेंहमनेसुनानेकेलिए
कितनेअल्फ़ाज़लिखेसारेज़मानेकेलिए
खोलरक्खेहैंदरीचेइसीउम्मीदकेसाथ
लौटआएगीहवादीपजलानेकेलिए
उसकामिलनाहीमुक़द्दरमेंनहींथावर्ना
हमनेक्याकुछनहींखोयाउसेपानेकेलिए
जानेकबआएगावोमेरीमोहब्बतकासफ़ीर
मेरेहरख़्वाबकीता'बीरबतानेकेलिए
आँधियाँबरसर-ए-पैकारनज़रआतीहैं
मेरीख़्वाहिशकेचराग़ोंकोबुझानेकेलिए
फूलसेलोगबड़ीदूरसेआए'फैज़ान'
ताजकाँटोंकामिरेसरपेसजानेकेलिए
  - Faizan Arif
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