subh likhti hai tira naam mirii aankhoñ men | सुब्ह लिखती है तिरा नाम मिरी आँखों में

  - Faiz rahil Khan
सुब्हलिखतीहैतिरानाममिरीआँखोंमें
क़ैदतन्हाईकीहैशाममेरीआँखोंमें
नींदआतीहैदु'आदेकेचलीजातीहै
अश्कजबकरताहैआराममिरीआँखोंमें
अबतिरेनक़्श-ए-कफ़-ए-पाकोमिटानेख़ुश्बू
आईहैगर्दिश-ए-अय्याममिरीआँखोंमें
दोक़दमसाथचलेतबतोबताऊँउसको
हैतिरीमंज़िल-ए-गुम-नाममिरीआँखोंमें
तुझकोऔरोंसेछुपायाहैहमेशालेकिन
साफ़दिखाताहैतिरानाममिरीआँखोंमें
फिरसेआग़ाज़-ए-मोहब्बतमैंकरूँँतोकैसे
क़ैदहैंइश्क़केअंजाममिरीआँखोंमें
  - Faiz rahil Khan
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