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Dipendra Singh 'Raaz'
rahne lage udaas to likhne lage the she'r
rahne lage udaas to likhne lage the she'r | रहने लगे उदास तो लिखने लगे थे शे'र
- Dipendra Singh 'Raaz'
रहने
लगे
उदास
तो
लिखने
लगे
थे
शे'र
सूखे
हुए
थे
पेड़
सो
कश्ती
बना
दिया
दिन
भर
लगा
के
उसको
बनाया
था
इक
मकाँँ
साहिल
की
एक
मौज़
ने
मिट्टी
बना
दिया
- Dipendra Singh 'Raaz'
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जैसे
देखा
हो
आख़िरी
सपना
रात
इतनी
उदास
थीं
आँखें
Siraj Faisal Khan
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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उदास
लोग
इसी
बात
से
हैं
ख़ुश
कि
चलो
हमारे
साथ
हुए
हादसों
की
बात
हुई
Abhishar Geeta Shukla
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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मैं
जंगलों
की
तरफ़
चल
पड़ा
हूँ
छोड़
के
घर
ये
क्या
कि
घर
की
उदासी
भी
साथ
हो
गई
है
Tehzeeb Hafi
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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तेरा
बुत
तो
नहीं
था
पास
मेरे,
तेरी
यादों
को
अपने
पास
रखा
गोया
हस्ते
हुए
भी
हमने
सदा,
अपने
दिल
को
बहुत
उदास
रखा
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Prince
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जैसे
उदास
करने
मुझे
आई
ईद
हो
तेरे
बगैर
कैसी
मिरी,
माई
ईद
हो
Sayeed Khan
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गर
कोई
मुझ
सेे
आकर
कहता,
यार
उदासी
है
मैं
उसको
गले
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
होता
दरवेश
अगर
मैं
तो
फिर
सारी
दो-पहरी
गलियों
में
सदा
लगाकर
कहता,
यार
उदासी
है
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Siddharth Saaz
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एक
था
वक़्त
जब
आँखों
में
था
ख़्वाबों
का
हुजूम
अब
तो
इक
ख़्वाब
टटोले
से
नहीं
मिलता
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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एहतियातन
पेश
आना
दिल
से
मेरे
इस
दफ़ा
ज़ख़्म
जो
पहले
दिए
थे
अब
तलक
नासूर
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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कभी
शायद
किसी
ने
ख़्वाब
में
सोचा
न
होगा
किसी
का
एक
जुमला
जान
ले
लेगा
किसी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम्हें
खोकर
के
ये
जाना
है
मैंने
नशा
किस
काम
आता
है
जहाँँ
में
Dipendra Singh 'Raaz'
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झोली
मेरी
ग़मों
से
भले
भर
दे
ऐ
ख़ुदा
लेकिन
जबीं
पे
उसके
कभी
इक
शिकन
न
हो
Dipendra Singh 'Raaz'
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