kuchh haqeeqat hai kuchh kahaanii hai | कुछ हक़ीक़त है कुछ कहानी है

  - Dinesh Kumar
कुछहक़ीक़तहैकुछकहानीहै
सिर्फ़कहनेकोहक़-बयानीहै
इश्क़-ए-फ़ानीरवाँहुआजबजब
हसरतोंपरचढ़ीजवानीहै
नावसाहिलपेकेडूबगई
ना-ख़ुदाओंकीमेहरबानीहै
जोदिएओटमेंथेवोहीबुझे
येहवाओंकीपासबानीहै
ज़र्दपत्तोंनेमुस्कुराकेकहा
फ़स्ल-ए-गुलहैहवासुहानीहै
शामकीचायउनकेसाथपि
यूँँ
दिलकीहसरतबहुतपुरानीहै
रौशनाईबनाईअश्कोंसे
मेरीग़ज़लोंमेंअबरवानीहै
  - Dinesh Kumar
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