KHud ko na ai bashar kabhi qismat pe chhod tu | ख़ुद को न ऐ बशर कभी क़िस्मत पे छोड़ तू

  - Dinesh Kumar
ख़ुदकोबशरकभीक़िस्मतपेछोड़तू
दरियाकीतेजधारकोहिम्मतसेमोड़तू
इसज़िंदगीकीराहमेंदुश्वारियाँभीहैं
रहबरकाहाथछोड़रिश्तोंकोतोड़तू
दुनियाकीहरबुलंदीकोहैतेराइंतिज़ार
एहसास-ए-ना-रसाईकीगर्दनमरोड़तू
मेहनतकेदमपेक्यानहींकरसकताआदमी
अपनेलहूकाआख़िरीक़तरानिचोड़तू
जोकुछहैतेरेपासवहीकामआएगा
बारिशकीआसमेंकभीमटकीफोड़तू
मनकीख़ुशीमिलेगीतूयेनेककामकर
टूटेहुएदिलोंकोकिसीतरहजड़ेतू
दो-गज़कफ़नहीअंतमेंसबकानसीबहै
अबछोड़भी'दिनेश'येदौलतकीहोड़तू
  - Dinesh Kumar
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