tira vujood tiri shakhsiyat kahaanii kya | तिरा वजूद तिरी शख़्सियत कहानी क्या

  - Dinesh Kumar
तिरावजूदतिरीशख़्सियतकहानीक्या
किसीकेकामआएतोज़िंदगानीक्या
हवसहैजिस्मकीआँखोंसेप्यारग़ाएबहै
बदलगएहैंसभीइश्क़केमआ'नीक्या
अज़लसेजारीहैताहश्रहीचलेगासफ़र
समयकेसामनेदरियाओंकीरवानीक्या
येमानताहूँमैंमेहमाँख़ुदाकीरहमतहै
केतुमनेदेखीनहींमेरीमेज़बानीक्या
ख़ुमार-ए-इश्क़भीउतरेगारोज़-ए-वस्लकेबाद
रहेगीअपनीभलाउम्रभरजवानीक्या
बिनालड़ेहीजोतूमुश्किलोंसेहाराहै
रगोंमेंतेरीलहूबनगयाहैपानीक्या
ख़ुशीकीचाहमेंकुछग़मउठानेपड़तेहैं
गुलोंकीख़ारनहींकरतेपासबानीक्या
  - Dinesh Kumar
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