khabar kahaan thii mujhe pahle is khazaane ki | ख़बर कहाँ थी मुझे पहले इस ख़ज़ाने की

  - Dinesh Kumar
ख़बरकहाँथीमुझेपहलेइसख़ज़ानेकी
ग़मोंनेराहदिखाईशराब-ख़ानेकी
चराग़-ए-दिलनेकीहसरतजोमुस्कुरानेकी
तोखिलखिलाकेहँसीआँधियाँज़मानेकी
मैंशाइ'रीकाहुनरजानतानहींबे-शक
अजीबधुनहैमुझेक़ाफ़ियामिलानेकी
वजूदअपनामिटायाकिसीकीचाहतमें
बसइतनीराम-कहानीहैइसदीवानेकी
वोघोंसलाभीबनालेगाबा'दमेंअपना
अभीहैफ़िक्रपरिंदेकोआब-ओ-दानेकी
मैंअश्कबनकेगिराहूँख़ुदअपनीनज़रोंसे
कहाँमिलेगीजगहमुझकोसरछुपानेकी
अनाथबच्चोंकीआहेंसवालकरतीहैं
ख़ुदाकोक्याथीज़रूरतजहाँबनानेकी
  - Dinesh Kumar
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