कुंज-ए-क़फ़ससेपहलेघरअपनाकहाँनथा
आएयहाँतोहौसला-ए-आशियाँनथा
तुझकोसमझकेख़्वाबमेंपहुँचामैंजिसजगह
देखाजोआँखखोलकेतोकुछवहाँनथा
इकइकक़दमपेअबतोक़यामतकीधूमहै
आगेतोयेचलनकभीऐजान-ए-जाँनथा
ठहरीजोवस्लकीतोहुईसुब्हशामसे
बुतमेहरबाँहुएतोख़ुदामेहरबाँनथा
क्यूँँकरक़समपेआजमुझेए'तिबारआए
किसदिनख़ुदातुम्हारेमिरेदरमियाँनथा
तोड़ाजोफूलबुलबुल-ए-शैदाकेसामने
क्यातेरेदिलमेंदर्दकुछऐबाग़बाँनथा