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Aman Mishra 'Anant'
ye jo dhalti hui jawaani hai
ye jo dhalti hui jawaani hai | ये जो ढलती हुई जवानी है
- Aman Mishra 'Anant'
ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
- Aman Mishra 'Anant'
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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मैंनू
तेरा
शबाब
लै
बैठा,
रंग
गोरा
गुलाब
लै
बैठा
किन्नी
पीती
ते
किन्नी
बाकी
ए
मैंनू
एहो
हिसाब
लै
बैठा
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Shiv Kumar Batalvi
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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वो
बुज़ुर्गों
की
बताई
तो
कहीं
मिलती
नहीं
अब
दुखों
को
झेलती
ही
बस
जवानी
रह
गई
Parul Singh "Noor"
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याद
आओ
मुझे
लिल्लाह
न
तुम
याद
करो
मेरी
और
अपनी
जवानी
को
न
बर्बाद
करो
Akhtar Shirani
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लुटा
दी
है
जवानी
जिसने
अपना
घर
बनाने
में
वही
बूढ़ा
हुआ
तो
घर
से
बेघर
हो
गया
है
अब
Nirbhay Nishchhal
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सैर
कर
दुनिया
की
ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी
फिर
कहाँ
ज़िंदगी
गर
कुछ
रही
तो
ये
जवानी
फिर
कहाँ
Khwaja Meer Dard
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इश्क़
में
तेरे
गँवा
दी
ये
जवानी
जानेमन
हो
गई
दिलचस्प
अपनी
भी
कहानी
जानेमन
Tanoj Dadhich
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बड़े
तगड़े
बवंडर
देखने
हैं
अभी
अपने
बराबर
देखने
हैं
अभी
तो
देखनी
है
उसकी
शादी
अभी
तो
दुख
भयंकर
देखने
हैं
वो
आए
और
मेरे
शे'र
देखें
वो
जिनको
भी
खुले
सर
देखने
हैं
वो
जिन
रेखाओं
में
है
नाम
उसका
मुझे
ऐसे
मुक़द्दर
देखने
हैं
हमीं
भाएँगे
तेरे
साथ
में
पर
तेरी
माँ
को
तो
अफ़सर
देखने
हैं
मुझे
ये
चाँद
तारे
और
बादल
तेरे
पहलू
से
लग
कर
देखने
हैं
ये
इक
ग़म
को
हराकर
नाज़
कैसा
अभी
दुखड़ों
के
लश्कर
देखने
हैं
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Aman Mishra 'Anant'
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जो
कई
अरसे
से
छुपाई
है
आज
पीड़ा
वही
सुनाई
है
और
हर
बार
की
तरह
रातें
याद
ले
अपने
साथ
आई
है
मानने
ही
नहीं
ये
वाला
मैं
दुनिया
ऐसी
ख़ुदा
बनाई
है
मेरा
दुख
दोस्त
था
बहुत
ज़्यादा
आपने
ताली
कम
बजाई
है
प्यार
तो
और
ही
किसी
से
था
और
किस
से
हुई
सगाई
है
एक
दिन
बे-हिजाब
आई
थी
यूँँ
लगा
बे-लिबास
आई
है
आ
गया
इम्तिहान
देने
मैं
और
कुछ
की
नहीं
पढ़ाई
है
राख
की
ज़िंदगी
मेरी
मैंने
उसकी
तस्वीर
नइ
जलाई
है
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Aman Mishra 'Anant'
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बबूलों
में
किसी
उलझे
बदन
सी
होने
लगती
है
जो
तेरे
बिन
कोई
छू
ले
चुभन
सी
होने
लगती
है
बिना
तन्हाई
के
इक
पल
रहा
जाता
नहीं
मुझ
सेे
किसी
से
बात
कर
लूँ
तो
घुटन
सी
होने
लगती
है
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Aman Mishra 'Anant'
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देख
के
लगता
है
ख़ुशी
तेरी
मुझ
सेे
बेहतर
है
ज़िंदगी
तेरी
नींद
ग़ायब
है
दो
महीनों
से
जाँच
में
आई
है
कमी
तेरी
हाल
बेहाल
करके
छोड़ा
है
देख
ली
लड़की
दोस्ती
तेरी
हम
को
उस
हाल
में
पकड़ती
तो
सोच
फिर
क्या
माँ
सोचती
तेरी
प्रेम
छोड़ो
गिरी
है
कम
से
कम
हम
अभागों
पे
रौशनी
तेरी
नींद
भी
आ
गई
थीं
आँखों
तक
और
फिर
याद
आ
गई
तेरी
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Aman Mishra 'Anant'
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ये
जो
आँखों
से
मेरी
बह
रहे
हैं
तेरे
होने
का
दुखड़ा
सह
रहे
हैं
हमें
जब
दाढ़ी
तक
आई
नहीं
थी
तभी
से
शे'र
अच्छे
कह
रहे
हैं
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Aman Mishra 'Anant'
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