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Aman Mishra 'Anant'
jo kaii arse se chhupaai hai
jo kaii arse se chhupaai hai | जो कई अरसे से छुपाई है
- Aman Mishra 'Anant'
जो
कई
अरसे
से
छुपाई
है
आज
पीड़ा
वही
सुनाई
है
और
हर
बार
की
तरह
रातें
याद
ले
अपने
साथ
आई
है
मानने
ही
नहीं
ये
वाला
मैं
दुनिया
ऐसी
ख़ुदा
बनाई
है
मेरा
दुख
दोस्त
था
बहुत
ज़्यादा
आपने
ताली
कम
बजाई
है
प्यार
तो
और
ही
किसी
से
था
और
किस
से
हुई
सगाई
है
एक
दिन
बे-हिजाब
आई
थी
यूँँ
लगा
बे-लिबास
आई
है
आ
गया
इम्तिहान
देने
मैं
और
कुछ
की
नहीं
पढ़ाई
है
राख
की
ज़िंदगी
मेरी
मैंने
उसकी
तस्वीर
नइ
जलाई
है
- Aman Mishra 'Anant'
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तजस्सुस
है
मुझे
बर
अक्स
होगा
ये
जहाँ
कैसा
मुझे
बस
इक
दफ़ा
शीशे
के
दूजे
पार
जाना
है
Aditya Pandey
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मेरी
इक
तस्वीर
देखी
तुमने
पल
भर
प्यार
से
और
वो
तस्वीर
उस
पल
और
प्यारी
हो
गई
Sanskriti Shree
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उठाओ
कैमरा
तस्वीर
खींच
लो
इन
की
उदास
लोग
कहाँ
रोज़
मुस्कराते
हैं
Malikzada Javed
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मैंने
तस्वीर
फेंक
दी
है
मगर
कील
दीवार
में
गड़ी
हुई
है
Ammar Iqbal
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एक
तस्वीर
बनाऊँगा
तेरी
और
फिर
हाथ
लगाऊंगा
तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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बहुत
से
लोग
हैं
तस्वीर
में
अच्छे
बहुत
अच्छे
तेरे
चेहरे
पे
ही
मेरी
नज़र
हरदम
ठहरती
है
Umesh Maurya
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बस
तेरी
तस्वीर
ही
इक
पास
थी
उस
में
भी
तू
बेख़बर
सोई
हुई
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S M Afzal Imam
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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मेरे
कमरे
में
उदासी
है
क़यामत
की
मगर
एक
तस्वीर
पुरानी
सी
हँसा
करती
है
Abbas Qamar
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कश्मकश
ख़त्म
कर
रहा
हूँ
मैं
ज़िंदगी
हार
मानता
हूँ
मैं
था
किसी
और
की
दु'आओं
में
और
जाने
किसे
मिला
हूँ
मैं
वस्ल
में
था
तिरे
तबह
पर
अब
तेरे
दुख
में
सँभल
चुका
हूँ
मैं
सोचता
हूँ
ये
देखकर
तुझको
देखकर
के
क्या
सोचता
हूँ
मैं
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Aman Mishra 'Anant'
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सामने
तेरे
हमारा
सोचता
हूँ
मैं
नज़ारे
से
नज़ारा
सोचता
हूँ
डर
लगेगा
दर्द
होगा
या
ख़ुशी
तब
जब
मिलेंगे
हम
दुबारा
सोचता
हूँ
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Aman Mishra 'Anant'
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माया
सर
यूँ
को
पार
आया
हूँ
राम
मैं
तेरे
द्वार
आया
हूँ
अपना
क़िस्सा
भी
कर्ण
जैसा
है
साँस
वचनों
पे
वार
आया
हूँ
माँ
की
ममता
का
मान
रखना
था
अपनी
राधा
बिसार
आया
हूँ
पात्र
बनके
किसी
कथा
का
मैं
अपनी
गाथा
को
मार
आया
हूँ
आया
हूँ
पहली
बार
ही
लेकिन
लगता
है
कितनी
बार
आया
हूँ
जीत
जिसको
प्रिये
बुरा
होता
ऐसी
बाज़ी
को
हार
आया
हूँ
कोई
क्यूँँ
पूछता
नहीं
मुझ
सेे
किस
लिए
तेज़
धार
आया
हूँ
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Aman Mishra 'Anant'
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दुख
बहुत
है
दोस्त
कम
है
इस
लिए
बस
आँख
नम
है
Aman Mishra 'Anant'
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व्यर्थ
ही
सुर्ख़ियाँ
नहीं
मिलती
दान
में
तालियाँ
नहीं
मिलती
एक
की
नौकरी
नहीं
लगती
पाँच
को
रोटियाँ
नहीं
मिलती
वरना
मैं
भी
ख़रीद
लेता
माँ
शहर
में
लोरियाँ
नहीं
मिलती
तुम
इसे
मेला
कैसे
कहते
हो
जब
यहाँ
चूड़ियाँ
नहीं
मिलती
आज
वो
फूल
भी
नहीं
खिलते
आज
वो
तितलियाँ
नहीं
मिलती
केक
मिलता
है
जन्मदिन
पर
अब
क्यूँ
कहीं
बूंदियाँ
नहीं
मिलती
पिछले
सब
कर्म
देखे
जाते
हैं
ऐसे
ही
बेटियाँ
नहीं
मिलती
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Aman Mishra 'Anant'
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