vyarth hi surkhiyaan nahin milti | व्यर्थ ही सुर्ख़ियाँ नहीं मिलती

  - Aman Mishra 'Anant'
व्यर्थहीसुर्ख़ियाँनहींमिलती
दानमेंतालियाँनहींमिलती
एककीनौकरीनहींलगती
पाँचकोरोटियाँनहींमिलती
वरनामैंभीख़रीदलेतामाँ
शहरमेंलोरियाँनहींमिलती
तुमइसेमेलाकैसेकहतेहो
जबयहाँचूड़ियाँनहींमिलती
आजवोफूलभीनहींखिलते
आजवोतितलियाँनहींमिलती
केकमिलताहैजन्मदिनपरअब
क्यूँकहींबूंदियाँनहींमिलती
पिछलेसबकर्मदेखेजातेहैं
ऐसेहीबेटियाँनहींमिलती
  - Aman Mishra 'Anant'
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