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Aman Mishra 'Anant'
dukh bahut hai dost kam hai
dukh bahut hai dost kam hai | दुख बहुत है दोस्त कम है
- Aman Mishra 'Anant'
दुख
बहुत
है
दोस्त
कम
है
इस
लिए
बस
आँख
नम
है
- Aman Mishra 'Anant'
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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ग़म
के
पीछे
मारे
मारे
फिरना
क्या
ये
दौलत
तो
घर
बैठे
आ
जाती
है
Shakeel Jamali
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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अब
क्या
ही
ग़म
मनाएँ
कि
क्या
क्या
हुआ
मियाँ
बर्बाद
होना
ही
था
सो
बर्बाद
हो
गए
shaan manral
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शिकस्ता
दिल
शब-ए-ग़म
दर्द
रुसवाई
अरे
इतना
तो
चलता
है
मुहब्बत
में
Sapna Moolchandani
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वो
आँखें
आपके
ग़म
में
नहीं
हुई
हैं
नम
दिया
जलाते
हुए
हाथ
जल
गया
होगा
Shadab Javed
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मज़ाक
सहना
नहीं
है
हँसी
नहीं
करनी
उदास
रहने
में
कोई
कमी
नहीं
करनी
Swapnil Tiwari
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तेरे
जाने
से
ज़्यादा
हैं
न
कम
पहले
थे
हम
को
लाहक़
हैं
वही
अब
भी
जो
ग़म
पहले
थे
Afzal Khan
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वो
जिसकी
याद
ने
जीना
मुहाल
कर
रखा
है
उसी
की
आस
ने
मुझको
सँभाल
कर
रखा
है
सियाह
रातों
में
साए
से
बातें
करता
है
तुम्हारे
ग़म
ने
नया
रोग
पाल
कर
रखा
है
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Harsh saxena
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पूजित
तुलसी
हर
दिन
बतलाती
थी
माँ
सूरज
से
पहले
उठ
जाती
थी
मुझको
वैसे
पढ़नी
है
ये
दुनिया
जैसे
नानी
मानस
पढ़वाती
थी
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Aman Mishra 'Anant'
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नहीं
है
वक़्त
कुछ
जल्दी
सिखाओ
बनाते
कैसे
हैं
कश्ती
सिखाओ
हुई
इतनी
सियानी
कब
तू
गुड़िया
जो
माँ
से
कहती
है
रोटी
सिखाओ
ये
पहला
दश्त
है
मजनूँ
हमारा
हमें
आता
नहीं
कुछ
भी
सिखाओ
बना
जब
बाप,
बेटा
बोला
माँ
से
सुनाती
थी
जो
तुम
लोरी
सिखाओ
सिखा
दी
ए
बी
सी
डी
अच्छी
लेकिन
ज़रा
इज़्ज़त
भी
तो
करनी
सिखाओ
वो
जो
तुझ
में
थी
अपना
सोचने
की
बशर
को
भी
वही
ख़ूबी
सिखाओ
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हूँ
यूँँ
टूटा
नहीं
था
जानता
मैं
मुझे
मेरी
हँसी
से
ख़ुश
लगा
मैं
उसे
मिलना
तो
था
बेबाक
होकर
वो
आई
सामने
तो
बिछ
गया
मैं
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Aman Mishra 'Anant'
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गिले
शिकवे
से
पहले
सोच
लेना
मुझे
चुभने
से
पहले
सोच
लेना
मेरे
बारे
में
तुम
क्या
सोचते
हो
मेरे
मरने
से
पहले
सोच
लेना
भरा
हूँ
मैं
निसाबों
से
दुखों
के
मुझे
पढ़ने
से
पहले
सोच
लेना
बहन
है
माँ
है
घर
में
बाप
भी
है
कि
विश
पीने
से
पहले
सोच
लेना
नशे
में
क्या
करोगे
होश
खो
कर
नशा
करने
से
पहले
सोच
लेना
कोई
सोया
कहीं
फ़ुटपाथ
पर
है
कभी
सोने
से
पहले
सोच
लेना
लड़ाई
आर
या
है
पार
की
ये
अमन
लड़ने
से
पहले
सोच
लेना
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Aman Mishra 'Anant'
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मुझे
समझे
मेरे
अश'आर
समझे
मुझे
क्या
है
कोई
दरकार
समझे
मेरी
चुप्पी
ही
मेरी
बुज़दिली
है
मेरे
अश्कों
को
मेरी
हार
समझे
नहीं
हिम्मत
दुबारा
ख़ुद-कुशी
की
न
कर
पाएँगे
फिर
से
प्यार
समझे
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Aman Mishra 'Anant'
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