laakh chehre the magar tujh sa kahii par bhi na tha | लाख चेहरे थे मगर तुझ सा कहीं पर भी न था

  - Dinakshi Sahar
लाखचेहरेथेमगरतुझसाकहींपरभीथा
थाबेहतरतुझकोखोकरहालबद-तरभीथा
इतनाकरदेताकितूकोईमुझेइल्ज़ामदे
दीसज़ापरजुर्मकोईतोमिरेसरभीथा
लड़खड़ाएपैरफिरक्यूँँक्यूँँनज़रखोसीगई
सिर्फ़तेरीयादथीहाथोंमेंसाग़रभीथा
होगयाजितनाकितन्हादोस्तोंकीभीड़में
दश्त-ओ-वीराँमेंअकेलाख़ुदकोपाकरभीथा
सचहैयूँँतोग़मबहुतथेक़ैदकरपाएनहीं
आसमाँसरपेखुलाथादिलयेबे-परभीथा
थीकोईऐसीमंज़िलजोमुझेआवाज़दे
मुझकोरक्खेबाँधकरऐसामिराघरभीथा
  - Dinakshi Sahar
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