main ki gham ki aag men doob kar sanwar gaya | मैं कि ग़म की आग में डूब कर सँवर गया

  - Dilkash Sagari
मैंकिग़मकीआगमेंडूबकरसँवरगया
औरहरगुरेज़-पाअपनीमौतमरगया
आपमुज़्महिलहोंदिलकीवारदातपर
फूलथाझुलसगयारंगथाबिखरगया
मुझसेक्याज़वालकीमुनासिबतकिदोस्तो
दिनढलेतोऔरभीग़ममिरानिखरगया
उनकोछूलियानिगाहनेतोयेलगामुझे
जैसेकोईरूहमेंदूरतकउतरगया
चेहरा-ए-हयातकोदेखकरलहूलहू
आजतोमैंअपनेहीदोस्तोंसेडरगया
  - Dilkash Sagari
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