jo bujh chuke hain vo lamhe ujaalata kyuuñ hai | जो बुझ चुके हैं वो लम्हे उजालता क्यूँ है

  - Dilkash Sagari
जोबुझचुकेहैंवोलम्हेउजालताक्यूँहै
मिरेबदनपेख़राशेंभीडालताक्यूँहै
मैंमो'तरिज़तोनहींहूँमगरयेसमझादे
जोमारनाहैतोदुनियाकोपालताक्यूँहै
तुझेतलाशहैजिसकीवोतेरीज़ातमेंहै
येकोह-ओ-बनयेसमुंदरखँगालताक्यूँहै
नहींहैवोतिराकोईतोफिरज़रूरतक्या
तूउसकेहुस्नकोशे'रोंमेंढालताक्यूँहै
अगरनहींहूँमैंमानिंद-ए-मेहर-ओ-महतोमुझे
ज़मींसेकोईफ़लकपरउछालताक्यूँहै
शिकस्त-ओ-मर्गमेंजबतर्ज़-ए-आसमाँहैतोफिर
तूअपनेटूटेहुएपरसँभालताक्यूँहै
मैंरसूलहादीपेशवाइमाम
मुझेतूमेरेवतनसेनिकालताक्यूँहै
  - Dilkash Sagari
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