dosto tum ne bhi dekhi hai vo soorat vo shabeeh | दोस्तो तुम ने भी देखी है वो सूरत वो शबीह

  - Dilkash Sagari
दोस्तोतुमनेभीदेखीहैवोसूरतवोशबीह
जोनिगाहोंमेंसमाजातीहैमंज़रकीतरह
मुझकोइकक़तरा-ए-बे-फ़ैज़समझकेगुज़र
फैलजाऊँगाकिसीरोज़समुंदरकीतरह
शहर-आशोबमेंचीज़ोंकाकोईक़हतनहीं
ज़ख़्ममिलतेहैंदुकानोंमेंगुल-ए-तरकीतरह
अपनेहाथोंकीलकीरोंमेंनहींहैशायद
हाएवोज़ुल्फ़जोखुलजाएमुक़द्दरकीतरह
मुझसेइतराओयारोकिमुझेहैमा'लूम
आपकाघरकिशिकस्ताहैमिरेघरकीतरह
दिलनेकुछख़्वाबतोदेखेथेमगरक्याकीजे
वोभीगुमहोगएतालाबमेंपत्थरकीतरह
  - Dilkash Sagari
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