tum ahl-e-dil ho so dil men rakha hamaara naam | तुम अहल-ए-दिल हो सो दिल में रखा हमारा नाम

  - Dheerendra Singh Faiyaz
तुमअहल-ए-दिलहोसोदिलमेंरखाहमारानाम
वगर्नाहमभीहैंक्याऔरक्याहमारानाम
हरएकशख़्सकेसीनेमेंहमधड़कतेहैं
सभीकेहोंटोंपेहैजा-ब-जाहमारानाम
तमामउम्रकईलफ़्ज़चाकपरघू
में
तबएकअर्सेमेंजाकरबनाहमारानाम
तुम्हारेकानोंकीढलतीहुईगुफाओंमें
ब-रंग-ए-रौशनीपड़ताहुआहमारानाम
सदाकुछऔरहीआईथीउसकीजानिबसे
हमेंलगाथाकिउसनेलियाहमारानाम
ख़मोशियोंकेबदनपरसदाएँलिखनीथीं
अजीबशख़्सथालिखनेलगाहमारानाम
फिरउसकोसुनकेबहुतदेरतकसभीरोए
कोईकहानीथीआख़िरमेंथाहमारानाम
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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