mila na lafz-e-museebat ko sargiraani se | मिला न लफ़्ज़-ए-मुसीबत को सरगिरानी से

  - Dheerendra Singh Faiyaz
मिलालफ़्ज़-ए-मुसीबतकोसरगिरानीसे
मआ'नीखुलनेनहींमेरेतर्जुमानीसे
हमारीनब्ज़मेंजुम्बिशहैपाँचहिज्रकेबा'द
हमाराइश्क़पुरानाहैराएगानीसे
सोउम्रभरमेंकिसीकोसमझनहींआया
जुदारखागयामुझकोमेरेमआ'नीसे
कभीसराबसेउठताहुआहीमिलजाऊँ
कभीकभीतोहैमुमकिनमिलूँपानीसे
लिहाज़ामरकज़ीकिरदारबनगयाहूँमैं
मुझेनिकालपाओगेअबकहानीसे
बा-एहतियातउसेसोचेहोगयाअर्सा
वोमेरेध्यानमेंआयाहैबे-धियानीसे
तुझेग़ज़लमेंपिरोनाहैशग़्लग़ालिबका
कितेरानक़्शबनेगातोसिर्फ़मा'नीसे
  - Dheerendra Singh Faiyaz
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